ग़म

ग़म-ए-जुदाई भी सह लूँगा…।

ये तन्हाई भी सह लूँगा…।

ना कहना कि चाहत है किसी और से..,

भला तेरी बेवफाई कैसे सह लूँगा…?

इस मासूम से दिल को न तोड़ो इस क़दर..,

भला इस टूटे दिल के साथ कैसे रह लूँगा…?

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मोहब्बत

मोहब्बत मे गुमनामी कैसी ?

ये इश्क की बदनामी कैसी ?

हमने तो सुना था इश्क में राज़ नही होते ।

फिर ये पसीने से लतपथ तुम्हारी पेशानी कैसी ?

जब तक तुम साथ हो मेरे,

मुझे इश्क मे परेशानी कैसी….?