मन्ज़िल

लोग कहते हैं कि हम किस्मत बदल कर दिखाएंगे,

वक्त आने पर तो किस्मत भी बदल जाती है मेरे दोस्त,

हम वक्त को बदल कर दिखाएंगे,

हर राह को अपनी मन्ज़िल तक ले जाएंगे,

सपनो को हक़ीक़त मे बदल कर दिखाएंगे,

हम अपनी मन्ज़िल को अपने क़दमो मे झुकाएंगे..

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ग़म

ग़म-ए-जुदाई भी सह लूँगा…।

ये तन्हाई भी सह लूँगा…।

ना कहना कि चाहत है किसी और से..,

भला तेरी बेवफाई कैसे सह लूँगा…?

इस मासूम से दिल को न तोड़ो इस क़दर..,

भला इस टूटे दिल के साथ कैसे रह लूँगा…?

ग़म

ये नम आँखे उनसे जुदाई का ग़म बयाँ करती हैं ।

ये यादे उनकी बेवफाई का ग़म बयाँ करती हैं ।

प्यार था उनसे कितना,

ये मेरी आँख से गिरी शबनम बयाँ करती है ।

मोहब्बत

मोहब्बत मे गुमनामी कैसी ?

ये इश्क की बदनामी कैसी ?

हमने तो सुना था इश्क में राज़ नही होते ।

फिर ये पसीने से लतपथ तुम्हारी पेशानी कैसी ?

जब तक तुम साथ हो मेरे,

मुझे इश्क मे परेशानी कैसी….?